
असीम मुनीर, पाक आर्मी चीफ।
इस्लामाबादः पाकिस्तानी सेना के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर का एक और बड़बोलेपन वाला बयान सामने आया है। पहले वीडियो में उन्होंने भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला था और पाकिस्तानियों को कहा था कि हम धर्म से, सोच से, विचारों से, अपनी महत्वाकांक्षाओं से भारत और हिंदुओं से अलग हैं। हम दो राष्ट्र हैं और एक नहीं हो सकते। यह आप लोग अपने बच्चों को बताइये। इस तरह की नफरत भरा बयान देने के बाद जनरल मुनीर ने भारत और कश्मीर को लेकर एक और भड़काऊ बयान दिया है।
उन्होंने पाकिस्तान में आतंकियों पर बोलते हुए भारतीय सेना को आड़े हाथों लिया और अपना बड़बोलापन दिखाया। मुनीर ने कहा कि लोग अफवाहें फैला रहे हैं, अगर आप ये सोचते हो कि आतंकी हमसे हमारी पहचान छीन लेंगे…तो उन्हें बता दो कि कान सुनकर सुन लें, ये पाकिस्तान महान देश है और हमारी सेना भी महान है। जब 1.3 मिलियन भारतीय सेना हमारा कुछ नहीं कर सकी, हमें मिटा नहीं सकी… तो ये आतंकी पाकिस्तानी सेना का क्या कर लेंगे।
पाक आर्मी चीफ ने कहा बलूचिस्तान पाकिस्तान के माथे की झूमर
पाक आर्मी चीफ को वीडियो में यह कहते हुए देखा जा रहा है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान की पहचान है, जो कि पाकिस्तान के माथे का झूमर है…तुम 1500 बंदे कहोगे कि इसको ले जाएंगे। तुम्हारी अगली 10 पुश्तें भी लेके नहीं जा सकतीं। इंशा अल्ला इन आतंकवादियों का जल्द सफाया होगा। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। मगर पाकिस्तानी सेना के आर्मी चीफ शायद यह भूल गए कि बांग्लादेश विभाजन के समय पाकिस्तानी सेना के चीफ और उनके 90 हजार से अधिक सैनिकों ने भारत के सामने पूंछ दबाकर सरेंडर कर दिया था।
कश्मीर को कहा-पाकिस्तान के गले की नस
पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने कश्मीर को पाकिस्तान के ‘‘गले की नस’’ बताया। मुनीर ने इस बात पर जोर दिया कि उनके पूर्वज मानते थे कि हिंदू और मुसलमान जीवन के हर पहलू में भिन्न हैं। कहा, ‘‘हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है, यह (कश्मीर) हमारे गले की नस थी, यह हमारे गले की नस रहेगी और हम इसे नहीं भूलेंगे। हम अपने कश्मीरी भाइयों को उनके संघर्ष में अकेला नहीं छोड़ेंगे।’’ इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, वरिष्ठ मंत्री और विदेश में रहने वाले पाकिस्तानी शामिल हुए। भारत ने पाकिस्तान से बार-बार कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख ‘‘हमेशा देश का अभिन्न अंग थे, हैं और रहेंगे।
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